नई दिल्ली: ठंड की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा फिर से जहरीली हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 352 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। यह स्तर बुधवार की तुलना में लगभग 80 अंकों की बढ़ोतरी दर्शाता है।
स्मॉग की चादर में लिपटी राजधानी
गुरुवार सुबह दिल्ली के आसमान पर घनी धुंध और स्मॉग की परत छाई रही। धूल और धुएं के मिश्रण से दृश्यता बेहद कम हो गई। राजधानी के कई इलाकों में लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण ठंडी और स्थिर हवाएं, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। रात के समय हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक कण वातावरण में फंस जाते हैं और सुबह के समय उनका स्तर सबसे ज्यादा रहता है।
दिल्ली के इलाकों में खतरनाक स्तर पर पहुंचा AQI
राजधानी के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता “गंभीर” श्रेणी को छू चुकी है।
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आनंद विहार: 409 (गंभीर)
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ओखला फेज-2: 353
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नेहरू नगर: 368
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आईटीओ: 356
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आरके पुरम: 347
ये सभी स्थान “बहुत खराब” या “गंभीर” श्रेणी में आते हैं, जिसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
NCR में भी सांस लेना हुआ मुश्किल
दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद की हवा भी बेहद खराब हो चुकी है।
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नोएडा सेक्टर 125: AQI 409
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गुरुग्राम सेक्टर 51: AQI 362
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फरीदाबाद: AQI 354
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर एक समान बढ़ रहा है क्योंकि भौगोलिक स्थिति और मौसमी परिस्थितियां लगभग एक जैसी हैं।
प्रदूषण के पीछे के कारण
पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में तापमान गिरने और हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में ऊपर नहीं उठ पाते।
इसके अलावा,
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वाहनों से निकलता धुआं,
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निर्माण कार्यों की धूल,
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पराली जलाना,
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औद्योगिक उत्सर्जन,
इन सभी कारणों से दिल्ली-एनसीआर की हवा दिन-प्रतिदिन और खराब होती जा रही है।
सरकार ने उठाए कदम
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कई नियंत्रण उपाय लागू किए हैं।
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सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू किया गया है ताकि धूल कम उड़ सके।
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वाहनों की जांच और एमिशन टेस्टिंग को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
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निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
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स्कूलों को प्रदूषण अलर्ट जारी किया गया है और बच्चों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक रूप से वाहन न चलाएं और कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों ने चेताया है कि यह हवा फेफड़ों, हृदय और आंखों के लिए बेहद हानिकारक है।
विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग सुबह या शाम के समय बाहर टहलने से बचें, घरों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और बाहर जाते समय N95 मास्क पहनें।
प्रदूषण नियंत्रण पर निगरानी
CPCB और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) लगातार AQI मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रही है।
दिल्ली सरकार जल्द ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के अगले चरण को लागू करने पर विचार कर रही है, जिसमें गंभीर स्थिति में स्कूलों की छुट्टियां, निर्माण कार्य पर रोक और डीज़ल जेनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध जैसे कदम शामिल होंगे।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में हर साल ठंड के आगमन के साथ प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप ले लेता है। इस बार भी हालात वही हैं। सरकार ने भले ही कई कदम उठाए हों, लेकिन जब तक नागरिक व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी नहीं निभाते, तब तक इस संकट से निजात पाना मुश्किल होगा।
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